बीरबल ने अकबर को कहाँ गधा

                                             



बीरबल ने अकबर को कहाँ गधा 

 
एक बार की बात है , बादशाह अकबर और उनका पुत्र सलीम तथा बीरबल  सवेरे  सवेरे पैदल ही सैर करने निकले।  प्रातः कालीन शीतल , मंद सुगन्धित हवा के चलने से उन लोगो का मन अत्यंत प्रसंन था , इसलिय वे टहलते काफी धुर चले गए। 

लौटते  वक्त सूर्य की धूप कुछ तपने लगी , तो राजा ने अपना राजकीय  पोशाक ( जो कपडे के ऊपर पहना जाता है ) उसे निकल कर बीरबल को दे दिया। 

उस पोशाक को बीरबल ने आराम से कपड़े की तरह कंधे में डाल लिया। 

देखा - देखी शहजादे ने भी अपना राजकीय पोशाक उतार कर बीरबल  को थमा दिया। 

बिरबल ने शहजादे के पोशाक  को भी अपने कंधे पर डाल दिया। 

यह देख कर बादशाह अकबर को मजाक करने की सूझी ,वह मुस्कुरा कर  बोले , " बीरबल अब तो  तुम्हारे ऊपर एक गधे का बोझ हो गया होगा।"

बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया , " जहाँपनाह एक नहीं बल्कि दो गधो का बोझ हो गया  है।  "


Previous
Next Post »